सूर्य साधना गृहस्थों को सुखी और समृद्ध जीवन जीने में मदद करती है। इस साधना का मुख्य उद्देश्य सूर्य देव की कृपा प्राप्ति करना होता है जो जीवन को प्रकाशमय बनाने में सहायक होती है। इस साधना से नाम, मान सम्मान के साथ प्रसिद्धी भी प्राप्त होती है। सूर्य साधना के द्वारा साधक को आत्मा का परिचय होता है और उसे आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
किसी भी रविवार से सुबह के समय सिद्ध सुर्य यंत्र और सूर्य गुटिका, सफेद चिरमी दाने को अपने सामने रखकर सूर्य माला से २१ माला जप ११ दिन तक लगातार करे। १२वे दिन दशांश हवन करे।
सूर्य साधना के लाभ:
- सुख और समृद्धि: सूर्य साधना से साधक को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सुखमय और समृद्ध होता है।
- आत्मविश्वास: इस साधना से साधक को अपने आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उसे अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा होता है।
- धार्मिकता: सूर्य साधना साधक को धार्मिकता की भावना सिखाती है और उसे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करती है।
- संतुलन: यह साधना साधक को जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है और उसका मानसिक संतुलन बना रहता है।
- जीवन में प्रकाश: सूर्य साधना से साधक को जीवन में प्रकाश की प्राप्ति होती है और उसे सभी ओर सकारात्मकता की भावना महसूस होती है।
- कर्म सिद्धि: इस साधना से साधक के कर्म सिद्ध होते हैं और उसे अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होती है।
- स्वास्थ्य लाभ: सूर्य साधना से साधक को शारीरिक स्वास्थ्य की भलाई होती है और उसके शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
- कार्यों में सफलता: यह साधना साधक के कार्यों में सफलता प्राप्त करने में सहायक होती है और उसे अच्छे नतीजे मिलते हैं।
- आत्मा का परिचय: सूर्य साधना से साधक को आत्मा का परिचय होता है और उसे अपने आत्मा की महत्वपूर्णता का अनुभव होता है।
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