मृत संजीवनी तंत्र: प्राणशक्ति का पुनर्निर्माण
Mrit Sanjeevani Tantra Ebook मृत संजीवनी तंत्र जीवन की उस अवस्था को समझने का माध्यम है, जहाँ शरीर जीवित होते हुए भी भीतर की ऊर्जा थक चुकी होती है। आज के समय में बहुत से लोग बिना किसी स्पष्ट बीमारी के भी भारीपन, खालीपन और निरंतर थकान महसूस करते हैं। मन काम करना चाहता है, लेकिन शक्ति साथ नहीं देती। भावनाएँ मौजूद होती हैं, लेकिन उनमें गर्मी नहीं रहती। यही स्थिति प्राणशक्ति के कमजोर होने की पहचान है।
यह ईबुक इसी मौन पीड़ा को समझकर लिखी गई है। इसका उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि समाधान देना है। मृत संजीवनी तंत्र यह बताता है कि जीवनशक्ति कभी समाप्त नहीं होती, केवल उसका प्रवाह रुक जाता है। सही समझ और सही माध्यम से उसी रुकी हुई ऊर्जा को फिर से सक्रिय किया जा सकता है।
DivyayogAshram की यह प्रस्तुति तंत्र को रहस्य या आडंबर के रूप में नहीं देखती। यहाँ तंत्र का अर्थ है जीवन को संभालने की विधि। यह पुस्तक गृहस्थ जीवन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जहाँ व्यक्ति परिवार, काम और जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल जाता है।
यह ईबुक सरल भाषा में समझाती है कि प्राणशक्ति क्या है, कैसे कमजोर होती है और कैसे उसका पुनर्निर्माण संभव है। यह एक ऐसा मार्ग है, जो व्यक्ति को भीतर से फिर से जीवित होने की अनुभूति देता है।
मृत संजीवनी तंत्र ईबुक परिचय
मृत संजीवनी तंत्र एक गहन लेकिन व्यावहारिक ग्रंथ है। यह उन लोगों के लिये लिखा गया है जो भीतर से टूट चुके हैं। जिनका शरीर चलता है, लेकिन ऊर्जा साथ नहीं देती। जिनका मन जागता है, लेकिन उत्साह नहीं जागता।
यह पुस्तक किसी कल्पना या चमत्कार की बात नहीं करती। यह जीवनशक्ति के वास्तविक क्षय और उसके पुनर्निर्माण पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि प्राणशक्ति कैसे कमजोर होती है। और कैसे साधारण गृहस्थ जीवन में उसे फिर से जागृत किया जा सकता है।
ये ईबुक DivyayogAshram की गहन साधना परंपरा पर आधारित है। यह तंत्र को डर या रहस्य नहीं, उपचार की दृष्टि से प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक उन लोगों के लिये है जो चुपचाप थक चुके हैं। और अब फिर से भीतर से जीवित होना चाहते हैं।
यह ईबुक किसके लिये है
- यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिये है जो भीतर से खाली महसूस करता है।
- जो बिना कारण थका रहता है।
- जिसे जीवन में आगे बढ़ने की ऊर्जा नहीं मिलती।
- यह गृहस्थ व्यक्तियों के लिये विशेष रूप से उपयोगी है।
- जो परिवार, काम और जिम्मेदारियों में खुद को खो चुके हैं।
- जो सब संभालते हैं, लेकिन खुद को नहीं संभाल पाते।
- यह उन साधकों के लिये भी है जिनकी साधना में ऊर्जा नहीं बन रही।
- जिन्हें मंत्र करते समय थकान महसूस होती है। और ध्यान में मन टिक नहीं पाता।
यह ईबुक किसी भी उम्र का व्यक्ति पढ़ सकता है। इसके लिये पूर्व साधना ज्ञान आवश्यक नहीं है।
ईबुक में क्या मिलेगा
- इस 203 पेज की ईबुक में प्राणशक्ति को समझने से लेकर उसके पूर्ण पुनर्निर्माण तक की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
- इसमें बताया गया है कि मृत ऊर्जा क्या होती है। उसके लक्षण कैसे पहचानें। और वह जीवन में कैसे प्रवेश करती है।
- आप सीखेंगे कि श्वास, मन और ऊर्जा कैसे जुड़े हैं। घर का वातावरण प्राण को कैसे प्रभावित करता है। और परिवार के तनाव से ऊर्जा कैसे गिरती है।
- इस पुस्तक में प्राण पुनर्निर्माण के लिये सरल लेकिन प्रभावी माध्यम बताए गये हैं। जिन्हें कोई भी व्यक्ति कर सकता है।
- यह ग्रंथ केवल जानकारी नहीं देता। यह भीतर बदलाव की प्रक्रिया शुरू करता है।
इस ईबुक के मुख्य लाभ
- यह ईबुक पढ़ने से व्यक्ति अपनी स्थिति को समझने लगता है।
- वह जान पाता है कि समस्या मन की नहीं, ऊर्जा की है।
- प्राणशक्ति के बढ़ने से मानसिक स्थिरता आती है।
- अनावश्यक भय और चिंता कम होने लगते हैं।
- नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- सुबह उठते समय भारीपन कम महसूस होता है।
- जीवन में फिर से उत्साह और स्पष्टता आती है।
- निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
- संबंधों में धैर्य और समझ बढ़ती है।
- घर का वातावरण हल्का और शांत होता है।
- मृत संजीवनी साधना
यह ईबुक क्यों अलग है
अधिकांश पुस्तकें केवल जानकारी देती हैं। यह पुस्तक अनुभव और उपचार पर आधारित है। यह डर, आडंबर या चमत्कार नहीं बेचती। यह जीवनशक्ति की वास्तविक समझ देती है। इसमें कोई कठिन साधना या भारी नियम नहीं हैं। यह गृहस्थ जीवन के अनुसार बनाई गई है।
DivyayogAshram की यह ईबुक तंत्र को जीवन से जोड़ती है, डर से नहीं।
ईबुक विवरण
ईबुक का नाम
मृत संजीवनी तंत्र: प्राणशक्ति का पुनर्निर्माण
कुल पेज – 203 पेज
भाषा- सरल और स्पष्ट हिंदी
मूल्य- केवल ₹149
फॉर्मेट- डिजिटल ईबुक
आपको यह ईबुक क्यों लेनी चाहिए
- यदि आप भीतर से थक चुके हैं।
- यदि आपको लगता है जीवन रुक गया है।
- यदि आप बिना कारण बोझ महसूस करते हैं।
- तो यह ईबुक आपके लिये है।
- यह आपको दोषी नहीं ठहराती।
- यह आपको समझाती है। और फिर धीरे धीरे संभालती है।
यह पुस्तक पढ़ने के बाद आप खुद को पहले से अधिक स्पष्ट महसूस करेंगे।
सपोर्ट और मार्गदर्शन
यदि ईबुक पढ़ते समय कोई प्रश्न हो। या किसी माध्यम में मार्गदर्शन चाहिए।
आप सीधे संपर्क कर सकते हैं।
Support
WhatsApp & Arattai: 7710812329
DivyayogAshram की टीम आपकी ऊर्जा यात्रा में सहयोग करेगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह ईबुक किसी भी व्यक्ति के लिये सुरक्षित है
हाँ। यह ईबुक पूरी तरह सुरक्षित है।
यह जीवनशैली और ऊर्जा संतुलन पर आधारित है।
प्रश्न 2: क्या इसके लिये गुरु दीक्षा जरूरी है
नहीं।
यह पुस्तक गृहस्थ व्यक्तियों के लिये बनाई गई है।
प्रश्न 3: क्या इसमें कोई खतरनाक तांत्रिक प्रयोग हैं
बिल्कुल नहीं।
यह पुस्तक उपचार और संतुलन पर आधारित है।
प्रश्न 4: क्या महिलाएं भी यह ईबुक पढ़ सकती हैं
हाँ।
यह पुस्तक पुरुष और महिला दोनों के लिये है।
प्रश्न 5: क्या इससे मानसिक शांति मिलेगी
हाँ।
प्राण संतुलन से मन स्वतः शांत होता है।
प्रश्न 6: कितने समय में प्रभाव महसूस होगा
यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।
कई लोगों को शुरुआती बदलाव जल्दी महसूस होते हैं।
प्रश्न 7: क्या यह ईबुक बार बार पढ़ी जा सकती है
हाँ।
यह पुस्तक हर बार नई समझ देती है।


